समय दिखाता रहा अँगूठे रिश्ते झूठे नाते झूठे , फिर उन्हें निभाते रहना , अनिकेतन जीवन समय दिखाता रहा अँगूठे रिश्ते झूठे नाते झूठे , फिर उन्हें निभाते रहना , ...
मगर सोचते सोचते क्यूँ ये सोचूँ , तुम मुझसे क्या कहोगी मैं तुमसे क्या कहूँ मगर सोचते सोचते क्यूँ ये सोचूँ , तुम मुझसे क्या कहोगी मैं तुमसे क्या कहूँ
रिश्ते है यहां मतलबी कौन अपना कौन पराया है रिश्ते है यहां मतलबी कौन अपना कौन पराया है
एक प्रतीकात्मक रचना जो इंगित करती है एक व्यक्तित्व को ॥॥। एक प्रतीकात्मक रचना जो इंगित करती है एक व्यक्तित्व को ॥॥।
अपना अपना करता है मन कुछ नहीं है अपना रे। अपना अपना करता है मन कुछ नहीं है अपना रे।
खुशियों के वितान में भारी भीड़ सभी की देखी। गम की धुंध में धुंधली सूरत अपनों की देखी।। खुशियों के वितान में भारी भीड़ सभी की देखी। गम की धुंध में धुंधली सूरत अपनों ...